कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने एक गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि कर्नाटक की आलंद विधानसभा सीट पर 2023 के चुनाव से पहले कांग्रेस समर्थकों को टारगेट कर लगभग 6,000 मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए गए। राहुल ने यह भी दावा किया कि यह काम स्वचालित सॉफ़्टवेयर और फर्जी आवेदन पत्रों के जरिए किया गया था।
राहुल गांधी ने इस घटना को लोकतंत्र के खिलाफ हमला बताया और कहा कि बीजेपी इस तरह की गतिविधियों से चुनावों को प्रभावित करना चाहती है। उन्होंने कहा कि आलंद विधानसभा क्षेत्र में यह गड़बड़ी कांग्रेस के वोट बैंक को कमजोर करने के लिए की गई थी।
इन आरोपों पर निर्वाचन आयोग ने तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि राहुल गांधी के आरोप पूरी तरह गलत और निराधार हैं। आयोग ने बताया कि वोटर लिस्ट से नाम हटाने का कोई भी काम ऑनलाइन सीधे संभव नहीं है। इस प्रक्रिया में हर मतदाता को सुनवाई का अधिकार होता है और नाम तभी हटाया जाता है जब वह साबित हो जाए कि व्यक्ति वास्तव में उस क्षेत्र का निवासी नहीं है या पात्रता पूरी नहीं करता। आयोग ने यह भी बताया कि आलंद मामले में कुछ असफल प्रयास जरूर हुए थे लेकिन उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई की गई है।
इस बयान के बाद मामला और गरम हो गया है, क्योंकि अब यह मुद्दा संसद और मीडिया दोनों में चर्चा का विषय बन गया है।





