अनुच्छेद 370 की बहाली की मांग: विवादों में उलझा राजनीतिक मुद्दा

जम्मू और कश्मीर में अनुच्छेद 370 को फिर से लागू करने की मांग ने राजनीतिक हलकों में नया विवाद खड़ा कर दिया। क्षेत्रीय दलों, खासकर नेशनल कॉन्फ्रेंस और पीडीपी, ने इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाया, जबकि बीजेपी ने इसे पूरी तरह खारिज कर दिया। पीडीपी की महबूबा मुफ्ती ने एक सभा में कहा, "अनुच्छेद 370 हमारी पहचान थी, और इसे वापस लाना हमारा हक है।"

 

केंद्र सरकार ने इस मांग को अस्वीकार करते हुए कहा कि अनुच्छेद 370 का हटना जम्मू और कश्मीर के विकास और एकीकरण के लिए जरूरी था। बीजेपी नेताओं ने दावा किया कि इससे क्षेत्र में आतंकवाद कम हुआ और निवेश बढ़ा। हालांकि, स्थानीय लोग और विपक्षी दल इससे असहमत हैं, और उनका कहना है कि यह फैसला बिना उनकी सहमति के लिया गया। सोशल मीडिया पर इस मुद्दे ने युवाओं के बीच बहस छेड़ दी, और कई ने इसे कश्मीर की सांस्कृतिक और राजनीतिक स्वायत्तता से जोड़ा। यह विवाद जम्मू और कश्मीर की राजनीति में लंबे समय तक असर डाल सकता है, खासकर तब जब क्षेत्र में सुरक्षा और विकास के मुद्दे पहले से ही चर्चा में हैं।

 

 

 

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